Monday, 3 October 2011


  • आज भी हमारे देश में हर घंटे एक किसान आत्म-हत्या करता है|
  • आज भी हमारे देश में 84 करोड़ लोगो कि रोज कि आय 20 रूपए से भी कम है|
  • आज भी हमारे देश में एक कटोरी चावल के लिए लोग अपनी माँ -बहन-बेटी-बीवी को दुसरो के साथ दुष्कर्म करने के लिए भेजते है क्योंकि उन से पूछो गरीबी क्या होती है|
  • आज भी हमारे देश में हर घण्टे 100 से ज्यादा लोग सिर्फ भूख और कुपोषण के वजह से मरते है|
  • आज भी हमारे देश में 2000-3000 रुपए में लड़कियाँ जीवन भर के  लिए बिकती है|
  • आज भी हमारे देश में गरीब इंसान कि जिंदगी जानवरों से भी बत्तर है|
  • आज भी हमारे देश में जो स्कीम बनती है उससे अमीर और अमीर होता है गरीब और गरीब|
  • आज अपने ही देश में लोग अपने घर से बेघर कर दिए जाते है, और अपने देश में भगोड़ो की जिंदगी जी रहे है|(उद्धरण :-कश्मीरी  हिन्दू )
  • बे-लगाम आतंकी हमले और नक्सलवाद|
  • बढते अपराध और फेल क़ानूनी वयस्था (अपराधी बेखोफ अपराध करते है और आसानी से कानून के शिकंजे से छुट जाते है क्योकि वो माननीय मंत्री जी होते है या  माननीय मंत्री जी के चमचे या मंत्री जी  के फिनंसर होते है जो उन्हें चुनाव के वक्त फिनांस करते है| इस कारण  रोज जेसिका और भवरी जैसी हज़ारो लडकिया जुर्म का शिकार बनती है) 
  • अपराधियो के साथ भेद-भाव| (सजा देने मे भी असमानता, उदहारण:- धनञ्जय चटर्जी को फाँसी दे दी गयी पर निठारी कांड के अभियुक्त दानव के साथ क्या किया गया| जेसिका लाल हत्याकांड हो या उज्जैन की विदेसी युवती के साथ बलात्कार की घटनाये ,ऐसे बहुत से उदहारण है जहाँ पर सरकार,न्यायालय और पुलिस इतनी सख्त नहीं हुई थी जितनी की धनञ्जय चटर्जी के वक़्त हुई थी)
  • सर्वोच्य अदालत के फैसले के बावजूद आतंकी अफजल गुरु और कसाब को फांसी नहीं दी गयी| और तो और चन्द फायदे के लिए सत्तारूढ़ दल द्वारा उसे बचाने की भी कोशिश की गयी|
  • आज भी हमारे देश में हमारे वोट से ही जीते हुए नेता जो हमारे   सेवक है, वही हमारी बातें नहीं सुनते और हमारा शोषण करते है|
  • बढती बेरोजगारी और गरीबी|
  • कमरतोड़ महंगाई|
"हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं , मेरी कोशिश है ये सूरत बदलनी चाहिए
मेरे सीने में नही तो तेरे सीने में ही सही , हो कहीं भी ये आग जलनी चाहिए"

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