Monday, 3 October 2011

अगर आप देश की मोजुदा हालत से संतुस्ट हे तो.......ये संगठन आपके लिए नहीं है!


हम किसी के विरोधी नहीं है
बल्कि हम हर उस व्यक्ति के साथ है जो देश के लिए लड़ रहा है हम सबकी मंजिले(भ्रष्टाचार मुक्त भारत ) एक है  परन्तु उस तक पहुचने के रस्ते और नजरिये अलग -अलग है ! बिलकुल उसी तरह जैसे आजादी के दौर  में भगत सिंग , राजगुरु , आजाद जी इत्यादी लोग गरम दल का नेतृत्व किया  थे ! दूसरी और गाँधी जी और पूर्ण कांग्रेस के नेता नरम दल का नतृत्व  किया करते थे ! दोनों दलों की विचार धराए एक दुसरे से विपरीत थी परन्तु मंजिल (आजादी) एक थी ! उस समय भी देश में नरम दल वाले  गांधीवादियों का ही बोलबाला था ! समाचार पत्र और पत्रिकाओ से  पत्रकारों ने पुरे  देश में  गंधिवादिता  की लहर  बनाने में  कोई कसर नहीं छोड़ी थी  ! गरम दल वालो की बातो को नजर अंदाज करके उन्हें आतकवादी करार दे दिया जाता था ! तब भगतसिंह जी को  अस्सेम्ब्ली  में बम्ब फोड़ के गिरफ़्तारी  देनी पड़ी ! वो जानते थे की गिरफ़्तारी से फाँसी तक के समय में पुरे भारत की नज़रे उन पर होंगी तब वह अपनी विचार धारा पूर्ण भारत वासीओ तक पंहुचा सकते है ! 
"आज तुम्हे मेरी याद नहीं आएगी , अगर कांग्रेस के हिसाब से देश को आजादी मिली तो केवल चहरे बदलेंगे व्यवस्था नहीं बदलेगी ! गोरे अंग्रेज चले जाएंगे , उनकी जगह भूरे अंग्रेज आ जाएंगे और आने वाले कुछ सालो में देश के मेहनतकश , नौजवान व इमानदार देश वासियों पर भ्रष्टाचार , बेईमानी , कालाबाजारी , साम्प्रदायिकता का केहेर टूट पड़ेगा , तब तुम्हे मेरी याद आएगी!"
भगत सिंह जी १९३१

पर किसी ने ये बात नहीं मानी और आज हम भुगत रहे है! आज समय अपने आप को दोहरा रहा है  बिलकुल १९३० की तरह आज देश में मीडिया वालो ने सिविल सोसाइटी (नरम दल वाले गांधीवादियो) की लहर बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी!!! हमें (गरम दल वालो को) नजरंदाज किया जा रहा है आज आपकी नजरे  हमारे उपर है अब हम भी अपनी विचारधारा आप तक पंहुचा सकता हूँ !!

" अभी आपको मेरी बाते समझ नहीं आएंगी, अगर सिविल सोसाइटी के हिसाब से भ्रष्टाचार ख़त्म  करना चाहोगे तो ना ही चेहेरे बदलेंगे ना ही व्यवस्था बदलेगी! पुराने भ्रष्टाचारी कायम रहेंगे , नए भ्रष्टचारी और आ जाएंगे ! आने वाले कुछ सालो में भ्रष्टाचार और भयानक रूप ले लेगा, चोर डकेती हत्या जेसी अपराधिक घटनाए कई गुणा बढ़ जाएंगी , मेहेंगाई बेईमानी , कालाबाजारी , साम्प्रदायिकता  बढ़ कर कोहराम  मचादेगी, तब तुम्हे मेरी बाते याद आएगी !" 
ईशान जायसवाल २०११ 











No comments:

Post a Comment