Monday, 12 December 2011

काले धन के विरोध में एक आवाज


यदि आप संयुक्त परिवार में रहते हो तब क्या आप अपने पुरखो की विरासत में से अपना हिस्सा छोड़ दोगे?
यदि कोई आपका हिस्सा जबरदस्ती हड़प ले तो क्या आप उसका विरोध नहीं करोगे?
यदि आपका जवाब "नहीं" है तो आज क्यों चुप हो!




पैसा सालो पहले जमा किया गया था ! 19वी शताब्दी के अंतिम सालो में और 20 वी शताब्दी में इतना पैसा बाहर लेजाना असम्भव है ! उस समय इन पैसो की कीमत आज से भी 100 गुणा ज्यादा थी क्योकि विकसित देशो में ब्याज की दर ना के बराबर होती है इसलिए सालो पहले रकम में धन इतना ही होगा जितना आज है ! उदहारण के लिए सालो पहले 1 रु की कीमत की अपेक्षा आज के 1 रु की कीमत में कितना अंतर है ये आप अच्छी तरह जानते है ! सोचो कितना ज्यादा हमे नुकसान हुआ है! भूल गए क्या 1992 और 1992 से पहले का दौर? इन देश द्रोहियों के कारण विदेशियों ने हमारे पैसे से हमे ही कर्जा देकर हम पर दबाव बनाया और खूब हमारी अर्थव्यवस्था का शोषण किया !
हम गरीब नहीं है ये हमारा ही तो पैसा है जो विदेशो में पड़ा है आखिर क्यों फिर हम ये जिल्लत की जिन्दगी जी रहे है?

कोई हम से 10 रु ज्यादा लेले तो हम हंगामा खड़ा कर देते हो और आज इन भ्रष्ट नेताओ ने हमारे कई लाख करोड़ रु छीने है तो हम चुप है ?

अब इस बात को दबाया जा रहा है, क्या ये लिस्ट मीडिया के पास नहीं है? यदि है तो क्यों इसको दिखाया नहीं जा रहा? क्यों इसकी चर्चा नहीं की जा रही?
क्योंकि ये काला धन एक ऐसा मुददा है जिसमे पक्ष और विपक्ष हर राजनैतिक पार्टी के नेता फँसते है जिसे मोका मिला उसने लूटा देश को और मीडिया तो सबसे ज्यादा भ्रष्ट है इन राजनीतिज्ञों के इशारों पर डमरू की तरह बजती है! आखिर इनकी मज़बूरी है 24 घण्टे का चेनल चलाना है तो इसलिए इन राजनीतिज्ञों के इशारे पे डमरू की तरह तो बजना ही पड़ेगा ! इनकी तो मजबूरी है आप लोगो की क्या मज़बूरी है? आप क्यों चुप हो? मेरे अकेले के बोलने से क्या होता है ये बोलके अब भी अपनी कायरता का परिचय दोगे या अपने हक़ की लड़ाई लड़ने के लिए आगे आओगे?




Monday, 3 October 2011


  • आज भी हमारे देश में हर घंटे एक किसान आत्म-हत्या करता है|
  • आज भी हमारे देश में 84 करोड़ लोगो कि रोज कि आय 20 रूपए से भी कम है|
  • आज भी हमारे देश में एक कटोरी चावल के लिए लोग अपनी माँ -बहन-बेटी-बीवी को दुसरो के साथ दुष्कर्म करने के लिए भेजते है क्योंकि उन से पूछो गरीबी क्या होती है|
  • आज भी हमारे देश में हर घण्टे 100 से ज्यादा लोग सिर्फ भूख और कुपोषण के वजह से मरते है|
  • आज भी हमारे देश में 2000-3000 रुपए में लड़कियाँ जीवन भर के  लिए बिकती है|
  • आज भी हमारे देश में गरीब इंसान कि जिंदगी जानवरों से भी बत्तर है|
  • आज भी हमारे देश में जो स्कीम बनती है उससे अमीर और अमीर होता है गरीब और गरीब|
  • आज अपने ही देश में लोग अपने घर से बेघर कर दिए जाते है, और अपने देश में भगोड़ो की जिंदगी जी रहे है|(उद्धरण :-कश्मीरी  हिन्दू )
  • बे-लगाम आतंकी हमले और नक्सलवाद|
  • बढते अपराध और फेल क़ानूनी वयस्था (अपराधी बेखोफ अपराध करते है और आसानी से कानून के शिकंजे से छुट जाते है क्योकि वो माननीय मंत्री जी होते है या  माननीय मंत्री जी के चमचे या मंत्री जी  के फिनंसर होते है जो उन्हें चुनाव के वक्त फिनांस करते है| इस कारण  रोज जेसिका और भवरी जैसी हज़ारो लडकिया जुर्म का शिकार बनती है) 
  • अपराधियो के साथ भेद-भाव| (सजा देने मे भी असमानता, उदहारण:- धनञ्जय चटर्जी को फाँसी दे दी गयी पर निठारी कांड के अभियुक्त दानव के साथ क्या किया गया| जेसिका लाल हत्याकांड हो या उज्जैन की विदेसी युवती के साथ बलात्कार की घटनाये ,ऐसे बहुत से उदहारण है जहाँ पर सरकार,न्यायालय और पुलिस इतनी सख्त नहीं हुई थी जितनी की धनञ्जय चटर्जी के वक़्त हुई थी)
  • सर्वोच्य अदालत के फैसले के बावजूद आतंकी अफजल गुरु और कसाब को फांसी नहीं दी गयी| और तो और चन्द फायदे के लिए सत्तारूढ़ दल द्वारा उसे बचाने की भी कोशिश की गयी|
  • आज भी हमारे देश में हमारे वोट से ही जीते हुए नेता जो हमारे   सेवक है, वही हमारी बातें नहीं सुनते और हमारा शोषण करते है|
  • बढती बेरोजगारी और गरीबी|
  • कमरतोड़ महंगाई|
"हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं , मेरी कोशिश है ये सूरत बदलनी चाहिए
मेरे सीने में नही तो तेरे सीने में ही सही , हो कहीं भी ये आग जलनी चाहिए"




अधीन भारत                                 स्वाधीन भारत

•  शोषक कोट वाले थे|                       • अब शोषक कुरते वाले है|
 विदेशी लुटेरे और अंग्रेज 
देश             •  अब  धन विदेश भारतीयों 
  का धन विदेश भेजते थे|                      द्वारा भेजा जा रहा है|
• उस समय जागीदारी प्रथा  थी.          •  अब ठेकेदारी प्रथा है|
• हम शारीरिक रूप से गुलाम थे.          • अब 
 शारीरिक  तथा मानसिक
                                                        दोनों रूप से गुलाम है|
•क्षेत्रवाद ,भाषावाद  तथा   
                 • क्षेत्रवाद,भाषावाद (उदहारण:-  
जातिवाद इत्यादि!                              राज्यों का विभाजन) आरक्षण
                                                       जाति वाद का ही विकसित
                                                        रूप है|
•उस समय आर्थिक स्थिति                • आज 65 साल  बाद  भी
 कमजोर थी                                      स्थिति  वही  बनी  हुई  है|
•भारतीयों में एकता की भावना           
• अब जातिवाद आधारित 
 थी                                                राजनीति से एकत खंडित 
                                                       हो गई है|



पहले भी हम गुलाम थे और आज भी हम गुलाम है|   
  साथियों हमारा तो ये ही कहना है "श्मशानों की ख़ामोशी व्यान  करती है कि केवल कफन बदले हैं, लाशे वही है"




 क्या कारण है महँगाई का????????
  • भारत सरकार अर्थव्यवस्था न मनमोहन सिंह की जेब से चलाती है और न ही सोनिया गाँधी की! सरकार अर्थव्यवस्था हम आम जनता कि जेब से चलाती है!
  • हर साल संसद में बजट पेश होता है जिसमे अनुमानित आंकड़े होते है! जो सरकार लोगो के भले के लिय खर्च करेगी!
  • सरकार को खर्च के लिय पैसे Indian Revenue Service (IRS) देती है यह भारत सरकार का विभाग है जो राष्ट्रपति भवन के नोर्थ ब्लाक में काम करता है!
  • IRS सरकारी खर्च के लिय कर के रूप में जनता से पैसा इकठा करने कि योजना बनाता है!
  • कर दो प्रकार के होते है! प्रत्यक्ष कर और अप्रत्यक्ष कर!
  • प्रत्यक्ष कर:- यह वो कर होता है जो हम प्रत्यक्ष रूप से (स्वमं) सरकार के पास जमा करते है! यह खाली विशेष व्यक्तियों (जिनकी सालाना आय सरकार द्वारा निधारित सीमा 300000 से अधिक होती है ) कि आय पर कुछ प्रतिशत लिया जाता है! इसे आय कर भी कहा जाता है!
  • अप्रत्यक्ष कर:- यह वो कर होता है जो हम अप्रत्यक्ष रूप से (उत्पादक, दुकानदार और सेवा उपलब्ध करवाने वालो द्वारा ) सरकार के पास जमा करवाते है! यह सभी व्यक्तियों से वस्तुओ और सेवाओ कि खरीद के वक्त लिया जाता है! उद्दाहरण:- वेट, एक्साइज, सर्विस टेक्स, हॉउस टेक्स, रोड टेक्स, स्टैम्प ड्यूटी इत्यादि!

मान लीजिये, IRS सरकारी खर्च 5 लाख करोड़ के लिए जनता से 5 लाख करोड़ इकठा करने कि योजना बनाता है! जिसमे उद्देश्य निधारित किया जाता है कि 5 लाख करोड़ में से 3 लाख करोड़ प्रत्यक्ष कर से और 2 लाख करोड़ अप्रत्यक्ष कर से इकठे किये जाएंगे!

आधा वर्ष होने पर IRS अपनी योजना का पुननिरीक्षण होने पर पता चलता है कि प्रत्यक्ष कर से 3 लाख करोड़ कि जगह 2 लाख करोड़ इकठे हो पाएँगे! (आप अच्छी तरह जानते हो कि भारत में 90% व्यवसायी और उधोगपति आय कर कि चोरी करते है )

अब आप बताए भारत सरकार प्रत्यक्ष कर 1 लाख करोड़ कि होने वाली कमी को कहा से पूरा करेगी?????????

जवाब आसन है! अप्रत्यक्ष कर से क्योंकि अप्रत्यक्ष कर आप दूध, दवाई, आटा, राशन, पेट्रोल, सीमिंट इत्यादि  सामान कि खरीद पर बार-बार देते हो! सरकार प्रत्यक्ष कर कि कमी पूरी करने के लिए अप्रत्यक्ष कर बड़ा देती है जिस कारण महँगाई बड जाती है!

अब आप बताए आपकी साल कि आय 300,000 लाख रूपये से कम है! और आप कहते है कि आप टैक्स नहीं भरते?
मान लिजिये आप रोज 100 रू अप्रत्यक्ष कर दे रहे हो! तो साल में आप 100 x 365= 36,500 रू दे रहे हो और भारत कि जन्म-संख्या 100 करोड़ से भी जादा है और हम सब हर साल 36,500 x 100,00,00,000...रू जमा कर रहे है जो सरकार के पास नहीं पहुँच पा रहा?

अब में आशा करता हूँ कि आप लोग समझ गये होंगे कि क्यों महँगाई बढ रही है...

अगर आप देश की मोजुदा हालत से संतुस्ट हे तो.......ये संगठन आपके लिए नहीं है!


हम किसी के विरोधी नहीं है
बल्कि हम हर उस व्यक्ति के साथ है जो देश के लिए लड़ रहा है हम सबकी मंजिले(भ्रष्टाचार मुक्त भारत ) एक है  परन्तु उस तक पहुचने के रस्ते और नजरिये अलग -अलग है ! बिलकुल उसी तरह जैसे आजादी के दौर  में भगत सिंग , राजगुरु , आजाद जी इत्यादी लोग गरम दल का नेतृत्व किया  थे ! दूसरी और गाँधी जी और पूर्ण कांग्रेस के नेता नरम दल का नतृत्व  किया करते थे ! दोनों दलों की विचार धराए एक दुसरे से विपरीत थी परन्तु मंजिल (आजादी) एक थी ! उस समय भी देश में नरम दल वाले  गांधीवादियों का ही बोलबाला था ! समाचार पत्र और पत्रिकाओ से  पत्रकारों ने पुरे  देश में  गंधिवादिता  की लहर  बनाने में  कोई कसर नहीं छोड़ी थी  ! गरम दल वालो की बातो को नजर अंदाज करके उन्हें आतकवादी करार दे दिया जाता था ! तब भगतसिंह जी को  अस्सेम्ब्ली  में बम्ब फोड़ के गिरफ़्तारी  देनी पड़ी ! वो जानते थे की गिरफ़्तारी से फाँसी तक के समय में पुरे भारत की नज़रे उन पर होंगी तब वह अपनी विचार धारा पूर्ण भारत वासीओ तक पंहुचा सकते है ! 
"आज तुम्हे मेरी याद नहीं आएगी , अगर कांग्रेस के हिसाब से देश को आजादी मिली तो केवल चहरे बदलेंगे व्यवस्था नहीं बदलेगी ! गोरे अंग्रेज चले जाएंगे , उनकी जगह भूरे अंग्रेज आ जाएंगे और आने वाले कुछ सालो में देश के मेहनतकश , नौजवान व इमानदार देश वासियों पर भ्रष्टाचार , बेईमानी , कालाबाजारी , साम्प्रदायिकता का केहेर टूट पड़ेगा , तब तुम्हे मेरी याद आएगी!"
भगत सिंह जी १९३१

पर किसी ने ये बात नहीं मानी और आज हम भुगत रहे है! आज समय अपने आप को दोहरा रहा है  बिलकुल १९३० की तरह आज देश में मीडिया वालो ने सिविल सोसाइटी (नरम दल वाले गांधीवादियो) की लहर बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी!!! हमें (गरम दल वालो को) नजरंदाज किया जा रहा है आज आपकी नजरे  हमारे उपर है अब हम भी अपनी विचारधारा आप तक पंहुचा सकता हूँ !!

" अभी आपको मेरी बाते समझ नहीं आएंगी, अगर सिविल सोसाइटी के हिसाब से भ्रष्टाचार ख़त्म  करना चाहोगे तो ना ही चेहेरे बदलेंगे ना ही व्यवस्था बदलेगी! पुराने भ्रष्टाचारी कायम रहेंगे , नए भ्रष्टचारी और आ जाएंगे ! आने वाले कुछ सालो में भ्रष्टाचार और भयानक रूप ले लेगा, चोर डकेती हत्या जेसी अपराधिक घटनाए कई गुणा बढ़ जाएंगी , मेहेंगाई बेईमानी , कालाबाजारी , साम्प्रदायिकता  बढ़ कर कोहराम  मचादेगी, तब तुम्हे मेरी बाते याद आएगी !" 
ईशान जायसवाल २०११